Sunday, 4 June 2017

बुध ग्रह की कहानी

हमारे ब्रम्हांड में सूर्य के सबसे समीप का ग्रह बुध है। ये ग्रह छोटा है और साथ ही बहुत गर्म भी। यहाँ जीवन की संभावना भी नहीं के बराबर है। हमारे पौराणिक ग्रंथों के अनुसार बुध ग्रह चंद्रमा और देवगुरू बृहस्पति की पत्नी की संतान है। जन्म होने के बाद अबोध बुध को चंद्रमा की सत्ताईस पत्नियों का शाप भी झेलना पड़ा जबकि वो निर्दोष था।
इस अबोध और निर्दोष ग्रह की कथा इस प्रकार है-
 एक बार चंद्रमा किसी काम से देवगुरू बृहस्पति के निवास पर पहँुचे। यहाँ उनकी भेंट देवगुरू की पत्नी तारा से हुई। वृद्धकाय बृहस्पति की नवयौवन से सम्पन्न कामिनी स्त्री तारा को देखकर चंद्रमा का चंचल मन काम के वशीभूत हो गया। कुछ जगह ऐसी कथा मिलती है कि बुध का जन्म चंद्रमा और बृहस्पति की पत्नी दृष्टि संबंध से ही हो गया था। कुछ अन्य अप्रचलित कथाओं में ऐसी भी कथा मिलती है कि चंद्रमा जो कि मन के स्वामी होने के कारण मन मार्गी हैं, बृहस्पति की पत्नी का हरण करके ले गए और उन्हें चंद्रमा पर बंदिनी बनाकर रख लिया। बृहस्पति को इस बात पर बहुत क्रोध आया वो शिकायत लेकर देवराज इंद्र के पास पहुँचे। इंद्र को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। कुछ अप्रचलित कथाओं के अनुसार चंद्रमा को जब ये बात पता चली तो वो समझ गए कि देवराज इंद्र देवताओं के साथ बृहस्पति की पत्नी को छुड़वाने आएंगे तो उन्होंने असुरों से सहायता मांगी। देवताओं के शत्रु असुर उनकी सहायता के लिए राजी हो गए और महान देवासुर संग्राम शुरू हो गया। देवता जब तक असुरों को हराकर बृहस्पति की पत्नी तक पहुँचे वो गर्भवती हो चुकी थीं। इन्हीं से ग्रहराज बुध का जन्म हुआ।
 ऐसा भी कहा जाता है कि ब्रम्हाजी ने हस्तक्षेप कर तारा को छुड़वाया था।
 बुध का जन्म हुआ तो चंद्रमा की सत्ताईस पत्नियों को क्रोध आ गया क्योंकि मनमार्गी चंद्रमा बहुधा रोहिणी को छोड़कर किसी को भी प्रेम योग्य नहीं समझते थे, इसलिए मन का विकार बुध पर शाप के रूप में निकला। उन सभी ने शिशु बुध को शाप दिया कि वो कभी भी सभी अन्य ग्रहों कि भाँति उनमें भ्रमण नहीं कर पाएगा। इसलिए ज्योतिष गणनाओं में बुध की गति गणना शुक्र की गति में आंकलन कर की जाती है। इसका वैज्ञानिक कारण यह भी है कि सूर्य के अत्यधिक निकट होने के कारण बुध की गणना संभव नहीं हो पा रही थी, इसलिए शुक्र और बुध की गति का भेद लेकर गति संधन किया जाता है।
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